अध्याय 60

समर की POV

एग्ज़ाम से एक दिन पहले, मैं हर जागते पल में बेचैनी और कॉफ़ी में डूबी रही।

दूसरी ज़िंदगी भर की यादें होने के बाद भी पेट में बँधी वो गाँठ नहीं खुली। दोबारा जन्म लेने से टेस्ट का डर अपने आप मिट नहीं जाता। लेकिन जैसे-जैसे मैं किरण के बनाए नोट्स पढ़ती गई, बातें समझ में आने लगीं—एक-एक कॉन...

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